शनिदेव लंगड़े क्यों है और शनिदेव पर तेल क्यों चढ़ाया जाता है ?


Shani Dev Langade Kyu Hai in Hindi : नमस्कार दोस्तों ! हमेशा की तरह ही आज भी हम आपके लिए एक रोचक जानकारी लेकर आ गये है। शनिदेव बहुत ही प्रतापी और प्रबल तेज वाले देवता है। ये इंसान को उसके बुरे कर्मों की सजा और अच्छे कर्मों का फल देने वाले है।

शनि भगवान जी की जो कोई भी पूजा अर्चना करता है, उसके जीवन में कभी कोई पीड़ा नहीं आती। शनि देव जी पाप-पुण्य का लेखा जोखा रखते है। और इसी के अनुसार वो इंसान को दंड या सौभाग्य प्रदान करते है।

हम सभी जानते है कि हर शनिवार को शनिदेव जी पर तेल चढाने का विधान है। शनिदेव को “लंगड़ा ग्रह” भी कहा जाता है। ऐसा क्यों है ? आपके इन सभी सवालों का जवाब लेकर आये है हम इस लेख में । तो चलिए शुरू करते है :


Shani Dev Langade Kyu Hai ? शनिदेव लंगड़े क्यों है ?


Lord Shani Deva Lame Story in Hindi : दोस्तों ! शनिदेव का प्रभाव एक राशि पर ढाई वर्ष, जिसे शनि की ढैया कहा जाता है तथा साढ़े सात वर्ष तक पड़ता है, जिसे शनि की साढ़े साती कहा जाता है। सभी नवग्रहों में शनि ग्रह अधिक मंद गति वाला है, इस वजह से शनिदेव को लंगड़ा ग्रह भी कहा जाता है। शनिदेव लंगड़े कैसे हुये ? इस बारे में एक कथा प्रचलित है, जो इसप्रकार से है : Shani Dev Kyun Langdakar Chalte Hain in Hindi.

जानिये कैसे हुये शनिदेव लंगड़े ?

हम सभी जानते है कि शनिदेव जी सूर्य भगवान के पुत्र है। इनकी माता का नाम संज्ञा देवी है, जो दक्ष प्रजापति की पुत्री है। एक बार सूर्यदेव के प्रबल तेज से कुछ दिनों तक मुक्ति पाने के लिए संज्ञा देवी ने एक उपाय सोचा। इसके लिए उन्होंने अपने शरीर से बिल्कुल अपने ही जैसी एक प्रतिकृति तैयार कर ली और उसे स्वर्णा नाम दिया।

संज्ञा देवी ने स्वर्णा को आदेश दिया कि वह उसकी अनुपस्थिति में उसकी संतानों की पूर्ण और उचित देखभाल करे। साथ ही उसके पति सूर्यदेव की सेवा करते हुए पत्नी सुख का भी भोग करे। ऐसा आदेश देकर माता संज्ञा देवी अपने पिता दक्ष प्रजापति के घर रहने चली गयी।

उनकी प्रतिकृति स्वर्णा ने ठीक वैसा किया, जैसा उन्हें अपनी स्वामिनी संज्ञा देवी का आदेश मिला था। स्वर्णा ने सूर्यदेव को बिल्कुल भी अहसास नहीं होने दिया कि वो संज्ञा देवी नहीं है। इस दौरान स्वर्णा ने सूर्यदेव के पांच पुत्रों और दो पुत्रियों को जन्म दिया। संतान हो जाने पर स्वर्णा का अपनी संतानों से अधिक मोह हो गया। और वह संज्ञा देवी की संतानों से अधिक अपनी सन्तानों का ही ख्याल रखने लगी।

शनि देव लंगड़ाकर क्यों चलते है ?

एक बार कुछ यूँ हुआ कि शनिदेव को बड़े ही जोरो से भूख लगी थी, उन्होंने अपनी माता से भोजन माँगा। तब स्वर्णा ने कहा कि थोड़ा रुको, पहले मैं भगवान को भोग लगा लूँ और फिर तुम्हारे छोटे भाई-बहिनों को भोजन कराने के बाद ही तुम्हे भोजन मिलेगा। इस बात को सुनकर शनिदेव को बहुत क्रोध आया और उन्होंने स्वर्णा को मारने के लिए पैर ऊपर उठा लिया।

इस उद्दंडता को देख स्वर्णा ने शनिदेव को शाप दिया कि तेरा ये पैर पूरी तरह से विखंडित हो जाये। इस शाप को सुनकर शनिदेव डर कर अपने पिता सूर्यदेव के पास दौड़े चले गये। पूरी बात बताने के बाद शनिदेव ने माता के शाप से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की।

शनिदेव की सारी बात जानने के बाद सूर्यदेव को संदेह हुआ कि कोई भी माता अपनी संतान के प्रति इतनी कठोर नहीं हो सकती , चाहे पूत कपूत ही क्यों ना हो ? ये जरूर शनि की माता के रूप में कोई और है। ऐसा सोचकर वे तुरंत स्वर्णा के पास गये और गुस्से से पूछा कि तुम संज्ञा के रूप में कौन हो ?

ये सुनकर सूर्यदेव के प्रबल तेज को देखकर स्वर्णा घबरा गयी और उसने पूरी सच्चाई बता डाली। सब जानकार सूर्यदेव का क्रोध शांत हो गया और उन्होंने स्वर्णा की कोई गलती ना पाकर उसे क्षमा कर दिया। फिर सूर्यदेव ने अपने पुत्र शनि को समझाया कि शनि ! स्वर्णा तुम्हारी माता तो नहीं है, लेकिन तुम्हारी माता के समान तो अवश्य ही है। इसलिए तुम्हें इनके साथ असभ्य व्यवहार नहीं करना चाहिए था।

शनि देव को लंगड़ा होने का शाप क्यों मिला ?

तब शनिदेव बोले – पिताश्री ! मुझे अत्यधिक भूख लगने के कारण क्रोध में सही गलत का पता ही नहीं रहा। मुझे क्षमा कर दीजिये। फिर शनिदेव ने स्वर्णा से भी माफ़ी मांगी और कहा ” हे माता ! मेरी भूल को अपना बच्चा जानकार माफ़ कर दीजिये।” शनिदेव को क्षमा याचना करते देख स्वर्ण का दिल पसीज उठा और वे बोली कि पुत्र ! मेरा दिया गया शाप निष्फल तो नहीं हो सकता लेकिन इसका प्रभाव थोड़ा कम अवश्य हो सकता है। तुम्हारा पैर पूरी तरह से विखंडित नहीं होगा, लेकिन लँगड़ेपन का दोष जरूर आ जायेगा।

इसप्रकार दोस्तों ! स्वर्णा के इस शाप की वजह से शनिदेव जी लंगड़े हो गये और तभी से वे लंगड़ाकर चलने लगे। अब आप समझ गये होंगे कि क्यों शनिदेवजी लंगड़े है ?


शनिदेव पर तेल चढाने की परम्परा क्यों है ?


Shani Dev Ko Tel Kyun Chadhate Hai in Hindi ? दोस्तों ! हर कोई शनिवार के दिन शनि भगवान पर तेल चढ़ाता है और तेल का दीपक भी जलाया जाता है। आज हम आपको बताएँगे कि शनिदेव पर तेल क्यों चढ़ाया जाता है : Why Oil is Offered to Shani Dev on Saturday in Hindi.

शनिदेव पर तेल चढाने की कथा :

Why Oil Pouring on Lord Shani on Saturday in Hindi : इस सम्बन्ध में भी आनंद रामायण में एक कथा का उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार — जब भगवान श्रीरामचन्द्र लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुन्द्र पर पुल का निर्माण कर चुके थे, तब एक आशंका यह व्यक्त की गयी कि कहीं लंका के राक्षस इस पुल को कोई नुकसान ना पहुंचा दे। ऐसा सोचकर इसकी रक्षा का भार हनुमानजी को सौप दिया गया।

हनुमानजी पुल की सुरक्षा में तैनात हो गये और श्रीराम के ध्यान में मग्न थे। तभी वहां से शनिदेव जी घूमते-फिरते आ निकले। वे हनुमानजी के पास जाकर बोलने लगे — “अरे ओ वानर ! मैं बहुत शक्तिशाली शनिदेव हूँ। मैंने तुम्हारी शक्ति के बड़े किस्से सुने है, पर मैं तुम्हे शक्तिशाली नहीं मानता।”

तब हनुमानजी बोले — “धन्यवाद शनि महाराज ! शायद आपका कहना सही है।” ऐसा कहने पर शनिदेव बोले — “अगर तुझमे शक्ति है तो मेरे साथ युद्ध कर वानर !”

हनुमानजी बोले — “शनि महाराज ! आप मुझे क्षमा कीजिये और मुझे मेरा कर्तव्य पूरा करने दीजिये। मैं अभी श्रीराम की आज्ञा का पालन कर रहा हूँ। कृपया आप मेरे काम में कोई विघ्न ना डाले।”

तब शनिदेव भड़ककर बोले — “विघ्न ! कैसा विघ्न। शायद तुम मुझसे युद्ध करने से डर रहे हो वानर !” इसप्रकार वे हनुमानजी का तरह-तरह की बातों से अपमान करने लगे और अंत में उन्होंने हनुमानजी को मजबूर कर दिया।

तब हनुमानजी ने शनिदेव को अपनी पूँछ में लपेट लिया। शनिदेव ने हनुमानजी की पूँछ से निकलने का खूब प्रयास किया। वो जितना जोर लगाते, उतना ही अधिक हनुमानजी की पूँछ उन्हें घेरती जाती। फिर हनुमानजी ने शनिदेव को पूरी तरह लपेट कर पत्थरों पर पटकना शुरू कर दिया।

श्रीराम और हनुमानजी के भक्तों की राशि में नहीं आते शनिदेव :

शनिदेवजी पीड़ा से व्याकुल होकर हनुमानजी से मुक्त करने की प्रार्थना करने लगे और उन्होंने हनुमानजी से क्षमा याचना की। तब जाकर शनिदेव का अहंकार चूर-चूर हुआ। हनुमानजी बोले — “मैं तुम्हे तभी मुक्त करूँगा, जब तुम ये वादा करो कि तुम कभी भी श्रीराम जी के भक्तों को पीड़ित नहीं करोगे।”

तब शनिदेव ने हाथ जोड़कर कहा — “हे पवनसुत ! मैं अपनी उद्दंडता पर शर्मिंदा हूँ। आप कृपा करके मुझे क्षमा कर दीजिये। मैं फिर कभी आपके और श्रीराम जी के भक्तों को पीड़ित नहीं करूँगा और ना ही उनकी राशि में आऊंगा।”

तब हनुमानजी ने उन्हें अपनी पूँछ के बंधन से मुक्त कर दिया और चेतावनी देते हुये कहा कि अगर तुमने भविष्य में इस वचन को तोड़ने का प्रयास किया तो मैं तुम्हें कठोर दंड दूंगा।

शनिवार को इसलिए चढ़ाया जाता है शनिदेव को तेल :

Shani Dev Ko Tel Chadhane Se Kya Hota Hai in Hindi : बंधन से मुक्त होने के बाद भी शनिदेव की पीड़ा समाप्त नहीं हुई और उन्होंने हनुमानजी से कोई पीड़ा निवारक तेल माँगा। तब हनुमानजी ने उन्हें एक ऐसा तेल दिया जिसे लगाने से शनिदेव जी की सारी पीड़ा दूर हो गयी।

ये ही वो वजह है कि शनिवार के दिन पीड़ा निवारण के लिए शनिदेव को तेल चढाने की परम्परा बन गयी। लोगों का मानना है कि शनिवार के दिन शनि भगवान को तेल चढाने से उनकी समस्त पीड़ा का नाश होता है। और शनि भगवान की कृपा प्राप्त होती है।

अच्छा तो दोस्तों ! अब आप अच्छे से जान ही गये होंगे कि Shani Dev Langade Kyu Hai | शनिदेव जी लंगड़े क्यों है ? और शनिवार के दिन शनिदेव पर तेल चढाने की परम्परा क्यों है ? आप भी शनिवार के दिन तेल जरूर चढ़ाये तथा साथ ही तेल का दीपक भी जलाये। इससे आपका जीवन खुशहाल रहेगा और आपको कोई पीड़ा नहीं होगी।


ये भी अच्छे से जानिये :


एक गुजारिश :

आशा है कि आपको आज की जानकारी “Shani Dev Langade Kyu Hai और शनिदेव पर तेल क्यों चढ़ाया जाता है ?“जरूर पसंद आयी होगी। शनि भगवान जी के बारे ये रोचक जानकारी सुनने के बाद आपको कैसा लगा ? कमेंट करके जरूर बताइयेगा।

अपने साथियों और परिवारजनों को भी इस अद्भुत जानकारी से अवगत अवश्य कराये। इसके लिए इस जानकारी को अधिक से अधिक शेयर कीजिये। शनि भगवान की कृपा हम सभी पर बनी रही। इसी शुभ कामना के साथ। जय शनिदेव भगवान ! धन्यवाद !


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