Navratri Festival | नवरात्री त्यौहार एवं नव दुर्गा स्वरुप


!! जय माता दी !! दोस्तों ! हमारा भारत देश त्योहारों का देश है और यहाँ हर त्यौहार बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। ऐसे ही एक बड़े त्यौहार के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे है। जिसका नाम है : Navratri Festival | नवरात्री त्यौहार

नवरात्री का पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। इस त्यौहार में देवी माँ के 9 रूपों की 9 दिनों तक उपासना की जाती है । इस बार नवरात्री 17 अक्टूबर, शनिवार से प्रारम्भ होकर 25 अक्टूबर, रविवार तक रहेगी। आज हम Navratri Festival | नवरात्री त्यौहार क्या है ? माँ दुर्गा के नव स्वरुप कौन कौनसे है ? इनकी पूजा उपासना विधि और कन्या पूजन के बारे में विस्तार से चर्चा करने जा रहे है।


Navratri Festival | नवरात्री त्यौहार क्या है ?


नवरात्री शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है : नव + रात्रि = 9 रातें अर्थात 9 रातों तक चलने वाला त्यौहार। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि एक वर्ष में नवरात्री पर्व 4 बार आता है। लेकिन ये हर वर्ष दो बार ही मनाया जाता है। इनमें 2 गुप्त नवरात्रा होते है।

  • चैत्र नवरात्री

हिंदी महीनों के अनुसार पहली नवरात्री त्यौहार चैत्र मास में मनाया जाता है। ये लगभग मार्च-अप्रैल महीने में आता है। ये वार्षिक नवरात्र कहलाते है।

  • शारदीय नवरात्री

दूसरी नवरात्री जिसे शारदीय नवरात्री भी कहा जाता है। ये हिंदी महीनों के अनुसार अश्विन मास में मनाया जाता है। ये सितम्बर-अक्टूबर महीने के लगभग आता है।


Maa Durga | माँ दुर्गा के नव स्वरुप

नवरात्रों में माता रानी के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है। Navratri Festival | नवरात्री त्यौहार पर माता के किन 9 रूपों की पूजा उपासना की जाती है ? और इनकी पूजा से क्या लाभ है ? इस बारे में हम आज जानने वाले है :


प्रथम दिन :

प्रथम शैलपुत्री

नवरात्री पूजन के प्रथम दिन घट स्थापना या कलश स्थापना का विधान है। कलश स्थापना के साथ ही माँ दुर्गा के प्रथम स्वरुप शैलपुत्री माता का पूजन किया जाता है। माँ दुर्गा के सभी नौ स्वरूपों में शैलपुत्री माता प्रथम दुर्गा है।

पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने की वजह से ये शैलपुत्री कहलायी। इन माताजी के दायें हाथ में त्रिशूल और बायें हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। इस दिन साधक अपने मन को “मूलाधार चक्र” में स्थित करके योगसाधना प्रारम्भ करता है।

दूसरा दिन :

द्वितीय ब्रह्मचारिणी

माँ दुर्गा की नव शक्तियों में से ब्रह्मचारिणी माता का दूसरे दिन पूजा अर्चन किया जाता है। ब्रह्म मतलब तपस्या और चारिणी मतलब आचरण करने वाली अर्थात तप का आचरण करने वाली माता। इनके दायें हाथ में जप की माला और बायें हाथ में कमण्डलु सुशोभित है।

ब्रह्मचारिणी माता की पूजा उपासना करने से इंसान में तप, त्याग, सदाचार और संयम जैसे भावों की अभिवृद्धि होती है। इस दिन साधक अपने मन को “स्वाधिष्ठान चक्र” में स्थित करके माँ की कृपा प्राप्त करता है।

तीसरा दिन :

तृतीय चन्द्रघण्टा

नवरात्री के तीसरे दिन चन्द्रघण्टा देवी माँ की उपासना की जाती है। मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचन्द्र होने से ये चन्द्रघण्टा कहलायी। स्वर्ण के समान चमकीले शरीर वाली ये माता सिंह की सवारी करती है। इस दिन साधक को माँ चद्रघंटा का शरणागत होकर शुद्ध अंतः करण से उपासना करनी चाहिए।

चौथा दिन :

चतुर्थ कूष्माण्डा

माँ दुर्गा का चतुर्थ स्वरुप कूष्माण्डा है। अपनी मंद, हल्की हंसी से ब्रह्माण्ड का सृजन करने के कारण ये कुष्मांडा कहलायी। नवरात्र पूजन के चौथे दिन माता कूष्माण्डा की पूजा अर्चना की जाती है।

इस दिन साधक अपने मन को “अनाहत चक्र” में स्थित करके माता की उपासना करता है। माता अपने भक्तों को सुख, समृद्धि की ओर ले जाती है। तथा साथ ही रोग शोक आदि से मुक्त करके यश, कीर्ति, बल और बुद्धि का आशीर्वाद देती है।

पांचवा दिन :

पंचम स्कन्दमाता

Navratri Festival | नवरात्री त्यौहार के पांचवे दिन स्कन्दमाता की पूजा की जाती है। ये माँ दुर्गा का पांचवा शक्ति स्वरूप है। ये स्कन्द कुमार कार्तिकेय की माता के रूप में भी जानी जाती है। इस दिन साधक अपने मन को “विशुद्ध चक्र” में अवस्थित करता है ।

कमल के आसान पर विराजमान होने के कारण इन्हे पद्मासना देवी भी कहा जाता है। पांचवे दिन का शास्त्रों में पुष्कल महत्व है। स्कंदमाता की उपासना से इंसान के व्यावहारिक ज्ञान की वृद्धि होती है।

छठा दिन :

षष्ठम कात्यायनी

नवरात्री के छठे दिन कात्यायनी माँ की पूजा की जाती है । महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर ये उनकी पुत्री के रूप में प्रकट हुयी। इसलिए इन्हें कात्यायनी कहा जाता है ।

इस दिन साधक का मन “आज्ञा चक्र” में अवस्थित होता है। और वह अपना सर्वस्व माता कात्यायनी को समर्पित करके अलौकिक तेज से युक्त हो जाता है। इनकी उपासना से गृहस्थ जीवन की सुख शांति बनी रहती है और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।

सातवाँ दिन :

सप्तम कालरात्रि

कालरात्रि देवी माता दुर्गा का सातवां शक्ति स्वरुप है। कालरात्रि माँ का यह स्वरुप अत्यंत भंयकर और शुभ फल देने वाला है। इसी कारण इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है। काले वर्ण के साथ, बाल बिखरे हुए काल रात्रि माता गर्दभ (गधे) पर विराजमान है।

इनका ये स्वरूप काल का नाश करने वाला है। इस दिन साधक का मन “सहस्रार चक्र” में अवस्थित होता है। माँ कालरात्रि की कृपा से दुष्टों का नाश होता है और सभी गृह बाधाएं दूर हो जाती है।

आठवाँ दिन :

अष्टम महागौरी

नवरात्री के आठवे दिन माँ दुर्गा के अष्टम स्वरूप महागौरी की उपासना का विधान है। इन्होंने पार्वती रूप में भोलेनाथ को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। इससे इनका शरीर काला पड़ गया। प्रसन्न होकर भोलेनाथ जी ने गंगा के पवित्र जल से इनके शरीर को धोया। जिससे इनका स्वरुप अत्यंत कांतिमान और गौर हो उठा। इसीलिए इनका नाम महागौरी पड़ा।

ये श्वेत वस्त्र धारण किये हुए बैल पर विराजमान है। देवी माँ का ये स्वरुप अन्नपूर्णा की तरह है। इसीलिए इस दिन कन्या पूजन भी किया जाता है। इनकी उपासना से भक्तों के सभी कल्मष धुल जाते है और उन्हें वैभव और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

नौवाँ दिन :

नवम सिद्धिदात्री

माँ दुर्गा का अंतिम और नौवाँ स्वरूप सिद्धिदात्री है। इनका ये स्वरुप सभी सिद्धियां देने वाला है। ये देवी माँ हाथ में शंख, गदा और सुदर्शन चक्र लिए कमल पर विराजमान है।

कहा जाता है कि माँ सिद्धिदात्री से ही समस्त देवी-देवताओं को सिद्धियों की प्राप्ति हुयी है। इनकी कृपा से ही भोलेनाथ का आधा शरीर देवी का हुआ था और इसी वजह से भोलेनाथ इस संसार में अर्धनारीश्वर के नाम से विख्यात हुए थे। इनकी उपासना से भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है।


Navratri Festival | नवरात्री त्यौहार पूजा उपासना विधि


दोस्तों ! माता का आशीर्वाद पाने के लिए नवरात्री पर्व को पूर्ण विधि-विधान से मनाना चाहिए । आइये जानते है कि माता को प्रसन्न करने के लिए कौनसी पूजा विधि का पालन किया जाना चाहिए :

प्रतिमा स्थापना

दोस्तों ! माँ के नवरात्री पूजन शुभ फल देने वाले है। नवरात्री पर साधक को नित्य कर्म, स्नानादि करके शुद्ध वस्त्र पहनने चाहिए। इसके बाद मंडप में माता की मूर्ति या प्रतिमा | चित्र स्थापित करना चाहिए।

घट स्थापना

शुभ मुहूर्त देखकर माता के दाहिने भाग में कलश की स्थापना करनी चाहिए। जिसे घट स्थापना भी कहा जाता है। कलश के बिना धार्मिक कार्य पूर्ण नहीं माना जाता है। कलश ऐश्वर्य और सुख समृद्धि का प्रतीक माना गया है।

जौ बोना

कलश स्थापना के बाद कलश के सामने जौ बोने चाहिए। जौ बोना शुभ माना जाता है, क्योकि सृष्टि की शुरआत में जौ ही पहली फसल थी। जौ का तेजी से उगना घर में सुख-सम्पति के आगमन का प्रतीक है और इनका मुरझाना या ना बढ़ पाना किसी अनिष्ट का संकेत है।

दीप प्रज्वलन

मंडप के पूर्व कोण में दीपक जलाकर पूजा अर्चना प्रारम्भ करे। दीपक के बिना पूजा विधान अधूरा है। देशी घी का दीपक जलाकर पूजा करने से माँ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

नारियल

नवरात्री पूजन में नारियल भी जरूर रखे। शुभ कार्यों में नारियल रखने का भी विधान होता है। कहते है कि नारियल में भगवान विष्णुजी और माता लक्ष्मीजी का वास होता है।

मस्तक टीका

ध्यान रहे कि पूजा आरम्भ करने से पहले मस्तक पर टीका अवश्य लगाए। कभी भी शून्य मस्तक से या बिना टीका लगाए पूजा करना सही नहीं रहता।

पूजन सामग्री

माँ दुर्गा की पूजन आराधना में कुछ अन्य सामग्रियों का भी होना बहुत आवश्यक है जो निम्न प्रकार से है :

  • देवी की प्रतिमा
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, चीनी और शहद)
  • लाल वस्त्र
  • धुप, दीप, अगरबत्ती
  • नारियल, प्रसाद
  • रोली, चन्दन, अक्षत
  • पुष्प या पुष्पमाला
  • दक्षिणा
  • अन्य श्रृंगार का सामान
  • पान, लौंग, इलायची
  • फल, सुपारी, नेवैद्य आदि।

पूजा-अर्चना :

सबसे पहले गणपति जी की पूजा करे और फिर सभी देवी-देवताओं की पूजा के साथ माता रानी के समस्त स्वरूपों की 9 दिनों तक उपासना करे। नवरात्री में प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से दुर्गा माँ अत्यंत प्रसन्न होती है और आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है।


Navratri Kanya Poojan | नवरात्री कन्या पूजन


Navratri Festival | नवरात्री त्यौहार के आठवें या नौवें दिन कन्या पूजन का भी विधान है। इस दिन माता को हलवा, पूरी, खीर तथा अन्य मिठाई का भोग लगाया जाता है। माता की यथावत पूजा अर्चना करने के बाद कन्या पूजन किया जाता है। माता की अतिशय प्रसन्नता और कृपा प्राप्त करने के लिए कुमारी कन्याओं को खाना अवश्य खिलाना चाहिए।

इन कन्याओं की संख्या कम से कम 9 तो होनी ही चाहिए। शक्ति न होने पर 2 भी हो सकती है। भोजन करने वाली ये कन्या आयु में 10 वर्ष से नीचे हो तो उत्तम रहता है। कन्या-भोजन के बाद इन्हें दक्षिणा अवश्य दे। इससे भगवती माँ आप पर प्रसन्न होकर मनोरथ पूर्ण कर देती है।


इसप्रकार दोस्तों ! आज हमने Navratri Festival | नवरात्री त्यौहार के बारे में आपको जानकारी देने का प्रयास किया है। उम्मीद करते है कि अब आपको Navratri Festival | नवरात्री त्यौहार एवं नव दुर्गा स्वरुप के बारे में समझ आया होगा। आप भी नवरात्री के इस पवन अवसर पर माँ भगवतीजी की पूजा उपासना कीजिये और अपने जीवन को सुख-सम्पति और ऐश्वर्य से सरोबार कीजिये।


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एक गुजारिश :

दोस्तों ! आशा करते है कि आपको “Navratri Festival | नवरात्री त्यौहार” के बारे में हमारे द्वारा दी गयी जानकारी पसंद आयी होगी। सभी को माता के नवरात्र का शुभ फल प्राप्त हो सके। इसलिए इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया पर शेयर कीजिये।

आइए नवरात्री के इस पावन पर्व पर हम सब मिलकर जग जननी जगदम्बा माता को याद करे और उनकी कृपा से अपने जीवन को सफल और सुखमय बनाये। माता आप सभी के मनोरथ पूर्ण करे। नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाओं सहित ! पोस्ट पढ़ने और Technicalvk पर बने रहने के लिए आपका धन्यवाद..! जय माता दी !


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